कभी अंबाला की पहचान था पूरन सिंह का ढाबा, सदी के महानायक भी कर चुके प्रचार

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रावलपिंडी से आए पूरन सिंह का ढाबा कभी अंबाला की पहचान हुआ करता था। यही कारण है कि सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी अपने एक विज्ञापन में इसकी तारीफ करते नजर आए। कुछ दिन पहले खान-पान के एक एप पर सबसे ज्यादा इसे सर्च किया गया। अब अंबाला में पूरन सिंह के नाम पर ढाबों की बाढ़ सी आ गई है। इनमें सभी असली होने का दावा करते हैं।

अंबाला में जीटी रोड पर बस अड्डे के पास स्थित पूरन सिंह के ढाबे में आजादी के बाद से ही नॉनवेज खाने के शौकीन रुकते रहे हैं। अमिताभ बच्चन टीवी पर पूरन सिंह ढाबा का नाम लेते दिखे तो इसे और प्रचार मिला। अमिताभ जस्ट डॉयल का विज्ञापन कर रहे थे। जस्ट डॉयल के जेडी एप पर नॉनवेज खाने के शौकीन सबसे ज्यादा पूरन सिंह के ढाबे को सर्च कर रहे थे। यही वजह रही कि जब विज्ञापन बनाया गया तो इस ढाबे को दरकिनार नहीं किया जा सका।

आज हाल यह है कि अंबाला में ही पूरन सिंह ढाबा के नाम से पांच-छह ढाबे चल रहे हैं। इस नाम से कई ढाबे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में भी हैं। लिहाजा मालिक इन लोगो से कॉपीराइट की लड़ाई लड़ रहे हैं। अंबाला में एक ढाबा विजेंद्र भी चलाते हैं। बकौल विजेंद्र पूरन सिंह की पत्नी व गोद लिया हुआ बेटा इसी नाम से ढाबा चला रहे हैं, लेकिन मूल ढाबा पूरन सिंह ने उन्हें दिया था।

वह बताते हैं कि पिता नंदराम नागर ही पूरन सिंह को मीट की सप्लाई करते थे। बाद में वह खुद भी उनसे जुड़ गए। पूरन सिंह से तालमेल बनता गया। वो शायद ऐसा व्यक्ति ढूंढ रहे थे जो उनके इस काम को क्वालिटी के साथ आगे बढ़ाए। उन्होंने यह ढाबा उन्हें सौंप दिया। करीब पंद्रह-सोलह साल उनके साथ काम किया। पूरन सिंह ने क्वालिटी से समझौता नहीं करने का जो गुर दिया था वह आज भी ढाबे की पहचान की वजह है।

मटन करी व कीमा कलेजा ज्यादा मशहूर

ढाबा मालिक विजेंद्र नागर बताते हैं कि वह खान पान के परंपरागत मसालों का ही इस्तेमाल करते हैं। उनकी मटन करी व कीमा कलेजा ज्यादा मशहूर है। अंबाला से होकर गुजरने वाले लोग यहां पहुंचने से पहले ही ऑनलाइन बुकिंग कर लेते हैं। स्टेशन पर ट्रेन रूकते ही उन्हें डिलीवरी भी मिल जाती है।

बेटे के साथ पत्नी सावित्री चलाती हैं ढाबा

पूरन सिंह की पत्नी सावित्री भी अपने बेटे विशाल के साथ पूरन सिंह ढाबा चला रही हैं। यहां चिकन के शौकीनों का तांता लगा रहता है। उन्होंने ढाबे का नाम असली पूरन सिंह का न्यू ढाबा रखा है। बुजुर्ग हो चुकीं सावित्री देवी ने बताया उनके पति पूरन सिंह रावलपिंडी की कहूटा तहसील के ग्राम डेरा खालसा में रहते थे। वहां चिकन बनाया करते थे। विभाजन के बाद अंबाला आ गए और यहां पर चिकन का काम शुरू किया था। उनके चिकन का स्वाद अंबाला ही नहीं बल्कि फिल्मी सितारों ने भी खूब चखा है।

अमिताभ और धर्मेंद्र भी चख चुके हैं स्वाद

सावित्री के मुताबिक उनके ढाबे पर अभिनेता धर्मेंद्र और अभिताब बच्चन जैसे फिल्मी सितारों ने चिकन का स्वाद चखा है। अमृतसर की तरफ से आने वाले वाले लोग चिकन खाने के लिए उनके ढाबे पर रुकते थे। खास स्वाद का कारण उनके मसाले हैं जिन्हें वह खुद तैयार करती हैं। बाजारी मसालों को आज तक इस्तेमाल नहीं किया। उनके ढाबे पर चिकन के लिए इतनी मारामारी रहती थी कि पूरन सिंह को इतनी फुर्सत नहीं होती थी कि वह सामान लेने के लिए चले जाएं, इसीलिए वह खुद कार चला कर जगाधरी समेत अन्य जगहों से सामान लेकर आती थीं।

और भी हैं पूरन सिंह के नाम पर ढाबे

पूरन सिंह के नाम पर शाम सुंदर भी ढाबा चला रहे हैं। उनके ढाबे का नाम पूरन सिंह का पुराना पंजाबी ढाबा है। श्याम सुंदर बताते हैं कि 1970 में उनके पिता धुनी चंद ने इसे शुरू किया था। उनके यहां पर मटन करी, चिकन करी, कीमा खाने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। पूरन सिंह के नाम पर चरणजीत सिंह भी ढाबा चला रहे हैं। उनके ढाबे का नाम पूरन सिंह का पुराना मशहूर ढाबा है। चरणजीत सिंह ने बताया कि 1950 में उनके ताऊ पूरन सिंह ने ढाबा शुरू किया था। इनके अलावा पूरन सिंह के नाम पर और भी कई ढाबे हैं।

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