जो खट्टर सरकार नहीं कर पाई, वो केजरीवाल सरकार ने कर दिखाया

2,992

दिल्ली के शालीमार बाग स्थित मैक्स हॉस्पिटल के खिलाफ केजरीवाल सरकार ने कड़ी कार्रवाई की है. जीवित बच्चे को मृत घोषित करने और सील करके परिजनों को सौंपने के मामले में दिल्ली सरकार ने मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द कर दिया है.

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सतेंद्र जैन ने बताया कि हमने हॉस्पिटल को आपराधिक लापरवाही बरतने का दोषी पाया है. हॉस्पिटल की यह पहली गलती नहीं है. ऐसा करना उसकी आदत में शुमार हो चुका है. लिहाजा मैक्स हॉस्पिटल का लाइसेंस तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाता है. उन्होंने कहा कि नवजात शिशु की मौत मामले में लापरवाही कतई बर्दाश्त नहीं की जा सकती है.

सत्येंद्र जैन ने कहा कि जो मरीज अस्पताल में भर्ती हैं, उनका उपचार जारी रखा जा सकता है, लेकिन नए मरीजों की भर्ती नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि मरीज अगर चाहें, तो दूसरे अस्पताल में स्थानांतरित हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि सरकार ने जिस जांच के आदेश दिए थे, उसकी अंतिम रिपोर्ट शुक्रवार को मिल गई और उसके बाद यह निर्णय लिया गया.

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पिछले महीने उन्होंने मैक्स शालीमार अस्पताल को ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) श्रेणी के तहत मरीजों के उपचार में समस्याओं के लिए नोटिस जारी किया था. उन्होंने कहा कि इसके अस्पताल खास अवधि के लिए आवंटित अतिरिक्त बेड का उपयोग जारी रखे हुए था, जबकि उसके उपयोग की समय सीमा समाप्त हो चुकी थी.

दरअसल, 30 नवंबर को दिल्ली के शालीमार बाग स्थित MAX हॉस्पिटल ने जीवित बच्चो को मृत घोषित कर दिया था और शव को प्लास्टिक के थैले में भरकर परिजनों को दे दिया था. इसके बाद परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने FIR दर्ज नहीं की थी और मामला मेडिकल की लीगल सेल को फॉरवर्ड कर दिया था. इसके बाद परिजनों ने हॉस्पिटल में जमकर हंगामा किया. मैक्स हॉस्पिटल ने वहीं बयान जारी कर कहा है कि वह बच्चे के परिजनों से अस्पताल लगातार संपर्क में है.

फोर्टिस हॉस्पिटल में भी धांधली का मामला

मैक्स हॉस्पिटल के अलावा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से सटे हरियाणा के गुरुग्राम स्थित फोर्टिस हॉस्पिटल में भी इलाज के दौरान धांधली का एक मामला सामने आया है. इसमें हॉस्पिटल ने सात साल की बच्ची के डेंगू के इलाज के लिए 15 लाख 59 हजार रुपये का बिल थमा दिया. इसमें बच्ची की मौत भी हो गई. इसके बाद मामले की जांच में हॉस्पिटल को दोषी पाया गया.

हरियाणा सरकार ने हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी. हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा कि मामले में राज्य सरकार फोर्टिस हॉस्पिटल के खिलाफ कार्रवाई करेगी. हॉस्पिटल ने लामा प्रोटोकॉल नहीं माना और बच्ची के परिजनों से हर मामले में ज्यादा फीस वसूला.

विज ने बताया कि मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया को भी खत लिखकर फोर्टिस हॉस्पिटल का लाइसेंस रद्द करने को कहा गया है. उन्होंने कहा कि यह एक तरीके की हत्या है. लिहाजा मामले में हरियाणा सरकार एफआईआर दर्ज कराने जा रही है. उन्होंने कहा कि भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304-A के तहत मामला दर्ज कराया जाएगा. उन्होंने कहा कि हरियाणा सरकार ने लीगल विभाग को एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश भेजी है.

रेयान स्कूल मामला

हरियाणा के गुरुग्रं का दूसरा मामला रेयान इंटरनेशनल स्कूल का है जहा एक बच्चे का उसके सीनियर ने स्कूल में मार दिया लेकिन हरियाणा सरकार ने कुछ नहीं किया पर परिजनों और हरियाणा के राजनितिक दलों के दबाव में आकर सीबीआई को केस लेना पड़ा. जिसमे सीबीआई ने लगभग मामला सुलझा लिया है.

हरियाणा के फोर्टिस हॉस्पिटल मामले में सरकार की तरफ से कोई कार्रवाई दिख नहीं रही है जबकि दिल्ली सरकार ने बिना किसी राजनीतिक समझोते से जनता और परिजनों के हक में फैसला लिया

फटाफट ख़बरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक, ट्विटर, गूगल प्लस पर और डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App

Leave A Reply

Your email address will not be published.