मोदी सरकार ने किसानों को दी खुशखबरी, खरीफ के लिए MSP को कैबिनेट की मंजूरी

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मोदी सरकार ने किसानों को दी खुशखबरी, खरीफ के लिए MSP को कैबिनेट की मंजूरी : केंद्र सरकार ने किसानों को बड़ा तोहफा दिया है। कैबिनेट ने खरीफ फसलों के न्यूनतन समर्थन मूल्य (एमएसपी) को डेढ़ गुना बढ़ाने पर मुहर लगा दी है। किसानों को फसल की लागत का कम से कम डेढ़ गुना दाम दिलाने के वायदे को पूरा करने की दिशा में कदम उठाते हुए सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 200 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ा दिया ।

बता दें कि पिछले साल धान की 1500 रुपए/कुंतल एमएसपी थी। यानी यह अब तक की सबसे बड़ी बढोत्तरी है। इस वृद्धि से सरकार के खजाने पर 33,500 करोड़ का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

सरकार ने यह निर्णय ऐसे समय लिया है जबकि कृषि उपजों के दाम गिरने से किसान परेशान हैं और आम चुनाव एक साल के अंदर होने वाले हैं. बीजेपी ने 2014 में किसानों से साथ चुनावी वादा किया था कि वह किसानों को उनकी लागत का डेढ़ गुना मूल्य दिलाएगी. इसे पूरा करने के लिए सरकार ने इस साल पहली फरवरी को पेश किए गए अपने आखरी पूर्ण बजट में इस वायदे को पूरा करने की घोषणा की.

खरीफ की फसल पर MSP बढ़ाना किसानों के साथ मजाक : जयहिंद

मालूम हो कि मंगलवार को कृर्षि मंत्री राधामोहन सिंह और नीति आयोग को सदस्य पीएम मोदी से मिले थे।मोदी का लक्ष्य है कि 2022 तक किसानों की आय को दोगुना कर दिया जाए। मोदी सरकार के एमएसपी बढ़ाने से सीधे तौर पर हरियाणा यूपी पंजाब महाराष्ट्र गुजरात जैसे राज्यों को सीधा फायदा पहुंचेगा। विशेषज्ञों की मानें, तो ऐसा होने से घर के बजट में इजाफा होगा। यानी महंगाई बढ़ सकती है, जबकि फसलों का मूल्य 20 फीसदी तक गिरने पर सरकार को एमएसपी मुहैया कराने के लिए सवा लाख करोड़ रुपये खर्च करना पड़ सकता है।

किसानों से किया था वादा :

पिछले हफ्ते गन्ना किसानों से बात करते हुए पीएम मोदी ने यह वादा किया था कि खरीफ सीजन के लिए फसलों के इनपुट कॉस्ट के 150 फीसदी तक एमएसपी करने की योजना को लागू किया जाएगा. उन्होंने कहा था कि उसे इस हफ्ते होने वाली कैबिनेट बैठक के दौरान मंजूरी दी जाएगी. इससे पहले भी मोदी सरकार की तरफ से गन्ना किसानों के लिए राहत दी गई थी.

देश के किसानों को बड़ी राहत देने के सरकार के निर्णय की सराहना करते हुए आर्थिक विशेषज्ञ अतुल सिंह ने कहा कि जाहिर है कि अनाज और दालों के दाम जब डेढ़ गुना होंगे, तो महंगाई में इजाफा होगा ही। इसका असर होटल, रेस्तरां और ढाबों की थाली पर भी पड़ेगा। हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह जरूरी है, क्योंकि मौजूदा मुद्रास्फीति की तुलना में कृषि उत्पादन की वृद्धि काफी कम है। ऐसे में एमएसपी डेढ़ गुना किए जाने पर देश के अन्नदाता को वाकई में राहत मिलेगी।

वहीं, नीति आयोग के सदस्य और कृषि मामलों के विशेषज्ञ रमेश चंद ने कहा कि डेढ़ गुना एमएसपी किए जाने से महंगाई पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। इसका कारण अन्य क्षेत्रों की तुलना में कृषि उत्पादन दरें बहुत ही कम हैं। वैश्विक स्तर पर तुलना करें, तो हमारे देश का किसान वाकई में कीमत के मामले में हाशिए पर है और इसमें सुधार बहुत जरूरी है।

मिलेगी उपज की उचित कीमत:

कृषि मामलों के विशेषज्ञ डॉ. देवेंद्र शर्मा ने कहा कि यह स्वाभाविक है कि जब थोक कीमतों में बढ़ोतरी होगी, तो उसका असर खुदरा बाजार में ज्यादा होगा। ऐसे में आम आदमी के लिए रसोई का खर्च जरूर बढ़ जाएगा, लेकिन दूसरी तरफ  अन्नदाता को इससे राहत मिलेगी। अगर बाजार मूल्य एमएसपी से कम रहता है, तो सरकार उन्हें शेष राशि मुहैया कराएगी। ऐसे में हर सूरत में उन्हें उपज का उचित दाम मिल पाएगा।

आसान नहीं होगी राह :

आर्थिक विशेषज्ञ दिपांशु अग्रवाल का कहना है कि किसानों को खरीफ फसलों का डेढ़ गुना एमएसपी मुहैया कराने में सरकार की राह आसान नहीं होने वाली है। सरकार इसे लागू करने के लिए कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेस यानि सीएसीपी को उत्पादन की लागत (ए2) के साथ सदस्यों की मेहनत (एफएल) के फॉर्मूले का इस्तेमाल करेगी। गौर करने वाली बात यह है कि मौजूदा एमएसपी किसानों को लागत और मेहनत, दोनों नहीं मुहैया करा पाती है। ऐसे में यह जरूरी है कि अन्नदाता की एमएसपी को डेढ़ गुना या उससे अधिक किया जाए।

चावल, कपास का घटेगा निर्यात :

कृषि मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, अगर सरकार डेढ़ गुना एमएसपी को हरी झंडी देती है, तो घरेलू बाजार में चावल की कीमत लगभग 13 फीसदी, मक्का की कीमत 15 फीसदी और कपास की कीमत लगभग 28 फीसदी बढ़ेगी। जाहिर है कि इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों में इजाफा होगा।

हालांकि चावल और कपास अंतरराष्ट्रीय बाजार से प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएगा। इनका अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात घटेगा। जबकि जरूरत से ज्यादा उपज होने पर खरीफ फसलों के दाम बाजार में 20 फीसदी तक गिरने पर सरकार को 1 लाख 14 हजार करोड़ रुपये का बोझ उठाना होगा। साथ ही, यातायात और भंडारण के लिए अलग से 10,000 करोड़ रुपये की लागत होगी। गौरतलब है कि केंद्र सरकार इसमें राज्यों की भी हिस्सेदारी रखेगी। लेकिन राज्य इसके लिए कितना तैयार होंगे ये तो वक्त ही बताएगा।

टेबल 
फसल       ए2+एफएल           मौजूदा एमएसपी             1.5 गुणा एमएसपी****
धान         1,117                1,550                                 1,759
अरहर         3,318                 5,250                                5,226
मूंग             4,286                 5,345                                6,750
बाजरा         949                   1425                                  1,424
मक्का        1044                   1425                                 1,566
कपास         3276                4020                                  4,914

 

खाद्य सब्सिडी बिल में होगी वृद्धि :

2016-17 के (अक्टूबर-सितंबर) की खरीद आंकड़े के हिसाब से धान का MSP बढ़ने से खाद्य सब्सिडी बिल में 11000 करोड़ रुपए की वृद्धि होगी. आपको बता दें, खाद्यान्न की खरीद और वितरण के लिए सरकार की नोडल एजेंसी भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) किसानों से एमएसपी पर गेहूं और चावल खरीदती है और खाद्य सुरक्षा कानून के तहत अनाज की आपूर्ति करती है.

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इस फॉर्मूले से तय होगी MSP :

जानकारों के मुताबिक, सरकार ए2+एफएल फॉर्मूला को अपनाने का प्रस्ताव लेकर आई है. ए2+एफएल फॉर्मूले के तहत फसल की बुआई पर होने वाले कुल खर्च और परिवार के सदस्यों की मजदूरी शामिल होगी. फिलहाल, बाजरा, उड़द, अरहर जैसे कुछ फसलो के लिए ये फॉर्मूला लागू है.

जमीन की कीमत नहीं होगी शामिल? :

फसल की पैदावार लागत में सभी तरह के खर्चे शामिल किए जाएंगे. इनमें बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी, मशीन आदि को शामिल किया जा सकता है. उसी आधार पर एमएसपी तय किया जाएगा. हालांकि, किसान की लागत में जमीन की कीमत शामिल नहीं होगी, जिसकी सिफारिश स्वामीनाथन आयोग ने की थी.

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