जींद की इस गोशाला में न चारा, न ही पानी, तिल-तिल मर रहा गोवंश

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जींद प्रशासन द्वारा संचालित नंदीशाला में अव्यवस्थाअों के चलते हर रोज भूखी अौर प्यासी गऊएं दम तोड़ रही है लेकिन इस अोर किसी का भी ध्यान नहीं है। आज भी यहां से जेसीबी मशीन द्वारा कई गाएं निकाली गई। यहां गऊओं को खाने को हरा चारा अौर पीने को पर्याप्त पानी नहीं है। इन सबके चलते अब तक सैकड़ों गाएं दम तोड़ चुकी है।

जींद की इस गोशाला में न चारा, न ही पानी, तिल-तिल मर रहा गोवंश

जयंती देवी मंदिर के सामने प्रशासन ने पिछले अरसे से एक नंदीशाला बनाई। शहर की सड़कों पर घूम रहे नंदियों और गऊओं को पकड़ कर यहां छोड़ दिया गया। सरकार का आदेश था कि सड़कों पर एक भी नंदी नहीं रहेगा।

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प्रशासन ने इन आदेशों की पालना की और तुरंत प्रभाव से जयंती देवी मंदिर के सामने खुली पड़ी जगह में यह अस्थाई नंदीशाला स्थापित कर पूरे शहर से पकड़ कर हजारों गऊओं और नंदियों को यहां छोड़ दिया गया। प्रशासन ने इस नंदीशाला के लिए पुख्ता प्रबंध करने की कोशिश की लेकिन उतने प्रबंध नहीं हो पाए जितने गऊओं और नंदियों की संख्या के हिसाब से होने चाहिए थे।

नंदीशाला में इस समय करीबन 4000 से ज्यादा नंदी और गऊएं हैं। इतनी गऊओं के लिए यहां हरे चारे की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हैं। भूखी रह-रह कर गऊओं की हड्डियां निकल आई हैं। पानी के लिए जो खोर बनाई गई हैं वे खाली पड़ी हैं। प्यासी गऊएं पानी पीने के लिए इन खोरों में आती हैं और मुंह मारकर चली जाती हैं। यहां पानी के लिए एक टैंकर आता हैं।

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जींद की इस गोशाला में न चारा, न ही पानी, तिल-तिल मर रहा गोवंश
जींद की इस गोशाला में न चारा, न ही पानी, तिल-तिल मर रहा गोवंश

यहां पर लेबर का काम करने वालों का कहना है कि हर रोज जेसीबी मशीनों से मृत गौवंश उठाकर ट्रॉलियों में भरा जा रहा है। यहां की व्यवस्थाएं उचित नहीं होने के चलते हालात इस स्थिति में पहुंच गए हैं।

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