देश के सरकारी बैंकों पर एक नजर: देखें, किसकी कितनी बुरी हालत

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देश के सरकारी बैंकों की हालत क्या है, यह किसी से छिपी नहीं है। विजय माल्या एवं नीरव मोदी आदि से जुड़े विभिन्न मामलों ने बैंकों की हालत पतली कर रखी है। दिसंबर 2017 तक देश के बैंकों के फंसे कर्ज का आंकड़ा 8 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका था। इसमें सरकारी बैंकों के हिस्से बड़ी रकम आती है।

वित्त वर्ष 2017-18 सरकारी बैंकों के बीच सबसे ज्यादा ₹12,130 करोड़ रुपये का नुकसान पंजाब नैशनल बैंक यानी पीएनबी को हुआ है। घाटे की लिस्ट में 7,718 करोड़ रुपये के साथ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) दूसरे जबकि 5,871.74 करोड़ रुपये के साथ ऑरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स तीसरे नंबर पर है। अब तक सिर्फ दो सरकारी बैंकों, विजया बैंक और इंडियन बैंक ने ही मुनाफा कमाया है। वित्त वर्ष 2017-18 में विजया बैंक को ₹727 करोड़ और इंडियन बैंक को ₹1,258 करोड़ रुपये का लाभ हुआ है।

आरबीआई ने अब 11 सरकारी बैंकों के खिलाफ प्रॉम्प्ट करेक्टिव ऐक्शन (पीसीए) जारी किया है जबकि देना बैंक और इलाहाबाद बैंक को वॉचलिस्ट में डाल दिया है। पीसीए के अधीन आनेवाले 11 बैंकों में शामिल हैं- देना बैंक, इलाहाबाद बैंक, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया, कॉर्पोरेशन बैंक, आईडीबीआई बैंक, यूको बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, ऑरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स और बैंक ऑफ महाराष्ट्र।

सरकार ने वित्त वर्ष 2017-18 से अगले दो वर्षों में सरकारी बैंकों में 2 लाख 11 हजार करोड़ रुपये डालने का ऐलान किया था। इसी के तहत, पिछले साल केंद्र सरकार ने 80 हजार करोड़ रुपये आवंटित कर दिए जिसमें पीसीए के अधीन आए 11 सरकारी बैंकों को 523 अरब रुपये मिले। बाकी 10 सरकारी बैंकों को 358 अरब रुपये दिए गए।

पीसीए के तहत आनेवाले बैंकों को कुछ नियमों का उल्लंघन करने पर कठोर कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। इसके तहत बैंकों को लाभांश वितरण में कटौती करनी पड़ सकती है, नई शाखाएं खोलने से रोका जा सकता है और उनके प्रबंधन को मिलनेवाले कॉम्पनसेशन पर रोक लगाई जा सकती है। बहुत बुरी स्थिति में आरबीआई कमजोर बैंक का किसी मजबूत बैंक के साथ विलय भी करवा सकता है। आइए डालते हैं कुछ प्रमुख सरकारी बैंकों की हालत पर एक नजर…

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