सांवली लड़की!

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सांवली लड़की! ये कोई कहानी नही है , ये उन बुरे अनुभवों का संग्रह है जो एक लड़की को उसके सांवले रंग के कारण हुए , शुक्रिया Neha अपने अनुभव शेयर करने के लिए , आपकी हिम्मत को सलाम:- Lokesh Bhiwani
अंजू बेटा स्कूल नही जाना क्या आज :- रमा ने अपनी इकलौती बेटी को जगाते हुए कहा।
अंजू 6th क्लास की मेधावी छात्रा थी। स्कूल की बाकी एक्टीविटी में भी सबसे आगे रहती है अंजू।
आज जब स्कूल पहुँची तो क्लास में सब बच्चे स्कूल में होने वाले एक फंक्शन के बारे में बारे में बात कर रहे थे,
अंजू को डांस अच्छा आता था , जो क्लास में , स्कूल में लगभग सब जानते थे।
मैम मुझे भी पार्टिसिपेट करना  है फंक्शन में …अंजू ने अपनी क्लास टीचर को कहा तो
टीचर ने भी डांस कॉम्पिटिशन में उसका नाम सबसे ऊपर लिख दिया,
आखिर उसकी उम्र के बच्चो में उससे बेहतर कोई नही था स्कूल में।
तैयारियों का आखरी पड़ाव था आज , जिसे खुद स्कूल प्रिंसीपल चेक़ कर रही थी।
उड़ लड़की को सबसे पीछे खड़ी करो ,किसने इसे आगे जगह दी…
प्रिंसीपल को गुस्से में यह कहते देख सब बच्चे सकते में आ गए ,
ओर सबसे ज्यादा अंजू जिसे कहा जा रहा था।
आखिर कहाँ गलती हुई थी उससे,
सब तो सराहना ही कर रहे थे अब तक डांस की……..
तो ऐसा क्यों अचानक ….सबसे पीछे मुझे खड़ा किया जा रहा है।
 बाकी बच्चे भी नही समझ पा रहे थे की क्यों प्रिंसिपल ने ऐसा किया।
 छुट्टी के समय जब क्लास टीचर ने बताया की तुम्हे तुम्हारे सांवले रंग की वजह से पीछे खड़ा किया जा रहा है …….
 तो मैं आँखों से आँसुओ को नही रोक पाई थी।
   वो पहली बार था जब मैंने खुद को कमजोर ओर असहाय महसूस किया था ।😢
उसके बाद बहुत बार मैंने वो चीज महसूस की , ओर हर बार खुद को कमजोर पाया था।
लेकिन मैंने अपनी खुशमिजाजीके कारण कभी खुद पर इस चीज को हावी नही होने दिया…..
टाइम के साथ साथ लोगो ने भी सहज ही लिया ।
लेकिन मुझे याद है स्कूल की वो फेयरवेल पार्टी
जब मैं 11th में थी ओर हम अपने सीनियर्स को विदाई पार्टी दे  रहे थे ।
हर बार की तरह इस बार भी डांस ही कर रही थी मैं ……
चेंजिंग रूम में जब मैं तैयार हो रही थी तो
क्लास मॉनिटर आई ओर कहा :- सिर्फ कपड़े पहनने से क्या होगा , इस शक्ल का भी करले कुछ।
उस समय जो मैंने महसूस किया , वो आज शब्दो में बयां नही कर सकती ।
बहुत जिल्लत भरे शब्द थे वो ,कांटे की तरह चुभ रहे थे उसके वो बोल।
लेकिन इन सब को सुनते सुनते मैं इग्नोर करना सीख गई थी इन्हें , अपने में बिंदास रहने लगी थी आजकल। जिसकी वजह से उस दिन की परफॉमेंस को नही बिगाड़ पाई थी उसकी वो कमेंट्स…।
लेकिन ऊपरी तौर पर तो इग्नोर कर देती थी उन कमेंट्स को लेकिन अंदर ही अंदर चुभते भी थे वो कई बार   ।।
स्कूल में सोचती थी कॉलेज में तो सब समझदार स्टूडेंट्स होते है तो वहाँ जाकर तो पीछा छुड़ जाएगा इन सब से।
लेकिन मेरा ये भृम भी कॉलेज के पहले ही दिन टूट गया था जब मैं व्हाइट सूट पहन कर गई थी ओर गेट पर ही एक लड़के ने कहा था की -अरे देखो फिर से ब्लैक एन्ड व्हाइट का  जमाना आ गया ओर उसके बाद वो सारे लड़के खिलखिलाकर दैत्यकार हँसी हँसे थे।
वो तो शायद उसके बाद भूल गए होंगे कहकर।
लेकिन वो हँसी आज  भी कानो में गूँजती है।
   ओर इन सब के बाद मेरा खुद से एक ही सवाल होता था की किया क्या है मैंने , गुनाह क्या है मेरा?😢
ख़ैर कॉलेज के बाद बीएड के लिए दूसरे कॉलेज में एड्मिशन हुआ ,
वहाँ जाकर कुछ राहत मिली थी।
शायद इसबार सही में समझदार साथी मिले थे या वो सिर्फ मन में सोचते होंगे , बाहर नही लाए कभी।
हाँ कभी कभी ब्लैक ब्यूटी जरूर कह देता था कोइ कोई ,
लेकिन ये अच्छा लगता था मुझे, इस शब्द में ताना नही था , इसमे मिठास था दोस्ती का , प्यार का।
बीएड बहुत हंसते खेलते / नेतागिरी करते कब गुजर गई पता ही नही चला,
अब शायद वहीं चीजें फिर से दोहराई जानी थी।
वहीं फेयरवेल पार्टी ओर मुझे फिर से टीचर्स द्वारा किसी न किसी टास्क में हिस्सा लेने की कहना।
इस बार ग्रुप डांस था जिसमे एक लड़का एक लड़की की जोड़ी बनाई जा रही थी।
       वैसे सब घुल मिलकर रहे थे अब तक लेकिन शायद आज मेरे साथ कोई नही आना चाहता था ,
       लास्ट में जो बचा उसे मेरा पार्टनर बनाया गया था , लेकिन उसके चेहरे से साफ पता चल रहा था की वो बिल्कुल भी ख़ुश नही  था मेरा पार्टनर बनकर  , आधे दिन के लिए भी नही😢
 (मेरी क्या गलती थी)
लेकिन मैं नही चाहती थी की मेरी वजह से किसी का दिन खराब हो ……इसलिए मैंने पार्टी  के दिन बीमारी का बहाना बनाकर छुट्टी कर ली।
खूब रोई थी रात भर मैं😢
       एक ही सवाल बार बार मेरे जहन में आता था की मैंने जान बूझकर तो नही चुना इस रंग को , ये मेरे अधिकारक्षेत्र में तो नही था ।
       फिर क्यू मुझे इसकी सजा हर मोड़ पर मिल रही है।
अब कॉलेज कम्प्लीट हो गया था तो
जैसा की हर भारतीय पिता की चिंता होती है
वो मेरे पिता को भी थी ।
शादी की चिंता ………………जिसके लिए मैं अभी तैयार भी नही थी ,क्योंकि अस्वीकृति का डर सताने लगा था की
कैसे फेस करूंगी मैं बार बार एक ही चीज की वजह से रिजेक्शन।
उस दिन पहली बार मुझे देखने आने वाले थे 
तो माँ कई दिन से ही तो हल्दी का लेप लगा लगा कर मेरा रंग संवारने की नाकाम कोसिस कर रही थी , आज वो ओर भी तेजी से कर रही थी, बावजूद मेरे रंग में रत्ती भर भी फर्क नही पड़ा।
वो लोग आए ………चाय नास्ते के टाइम मैं कुछ पूछ नही पाई , बस लड़के ओर उसके परिवार ने मुझे देखाभर ओर हाँ करदी……
ये कैसे हुआ , ये तो सोच के विपरीत हो गया।
घर में सब खुश थे ……..लेकिन ये खुशी लम्बे समय की नही थी।
उस समय सबका चेहरा उतर गया जब
लड़के के पिता ने शाम को फ़ोन पर  8 लाख कैश , मोटरसाइकिल ,ओर कुछ अन्य जरूरी समान की लिस्ट बनाकर देदी ,
ये कहते हुए की हम साँवली लड़की से शादी कर रहे है तो आपको भी इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी 😢
उस दिन भी मैं अकेले में खूब रोई थी ,
उसके बाद पिता जी की भी तबीयत खराब  हो गयी थी।
जिसका जिम्मेदार मैं खुद को मान रही थी।
उसके 2 साल के अंदर पता नही कितने ही लड़को द्वारा रिजेक्ट कर दि गई थी मैं ……
खुद की नुमाइश करते करते थक चुकी थी मैं अब ।
इस दौरान पता नही कितने ही लोगो ने मुझे हौंसला देने की नाकाम कोसिस की गई।
लेकिन मैं हमेसा एक ही चीज सोचती की
मेरी गलती ना होते हुए भी क्यों लोग मुझे ही समझा रहे है।
क्यों उन सुंदरता के पैमानों को मिटाने की बात एक व्यक्ति भी नही करता दिखता ,
तो यहां असल गलती किसकी है……..ख़ैर ये जो सब सोच सकती थी , सोच भी रही थी।
अब सब लोग ये सलाह देने लगे है की , खूब पढो
नॉकरी लग जाओ।
फिर रिस्तो की लाइन लग जाएगी…….एक से एक सुंदर लड़के तुमसे शादी करेंगे……
मैं हर रात को इन सब पर खुद से बात करती हूँ
आज भी खुद से ही पूछ रही हूँ,
अगर जॉब लग भी गई , तो शादी तो मेरी जॉब से करेंगे तो तथाकथित सुंदर लड़के……
तो इन सब में मेरा अस्तित्व कहाँ ?
मैं कहाँ ? मुझे किसने अपनाया?
खैर …… ये रातें दुखभरी भी कट जाएंगी ………
बस ये जमाना तय करना छोड़ दें अगर पैमाने।
निराश तो नही हूँ मैं , लेकिन इस पुरूषप्रधान समाज का ये सच बहुत अच्छे से जान चुकी हूँ आज ,
लोग मनुष्य से नही
उसकी देह , उसके रंग , उसके रूप , उसकी सम्पति से लगाव रखते है ।
………..
इन खूबसूरत चेहरों की दुनिया में ये मान लिया मैंने,
मुझसे इश्क़ करना इतना आसान नही ,ये मान लिया मैंने। ।।।।  
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ये लिखने का मेरा उद्देश्य सिर्फ वर्चुअल लाइक पाने से कहीं ज्यादा है , आशा करता हूँ  आप अपने स्तर पर इस रंगभेद को मिटाने के लिए काम करेंगे , करने को तो मैं इस कहानी को भी नकारात्मक से भरपूरकर इस कहानी की लड़की को लास्ट में लड़ते लड़ते थका कर  इस दुनिया से हराकर लटका देता फंदे पर , लेकिन इसे अधूरी छोड़ने के पीछे का कारण यही है की ये कोई कल्पना नही है , ये बहुत सी लड़कियों की सच्चाई है , जो जिंदगी के इस दौर से जूझ रही है ,बस आपका उनके प्रति नजरिया ही उनको उस अवसाद से निकाल सकता है । मैं सभी से अपेक्षा करूँगा की जो इसे पढ़े वो इसपर अपनी राय जरूर दें , ये ध्यान रखते हुए की आपका कमेंट इस समाज की हर उस साँवली लड़की के लिए है , जो कमी न होते हुए है पीड़ित है। हो सकता है आपका एक कमेंट उनमें सकारात्मकता का संचार करे ,ओर वो फिर से चल पड़े उन मंजिलों की ओर जिन्हें पाने के लिए कोई रंग , कोई जाती ,कोई धर्म की बेड़िया उनका रास्ता न रोक पाएं :- Lokesh Bhiwani

ये लिखने का मेरा उद्देश्य सिर्फ वर्चुअल लाइक पाने से कहीं ज्यादा है , आशा करता हूँ आप अपने स्तर पर इस रंगभेद को मिटाने के लिए काम करेंगे , करने को तो मैं इस कहानी को भी नकारात्मक से भरपूरकर इस कहानी की लड़की को लास्ट में लड़ते लड़ते थका कर इस दुनिया से हराकर लटका देता फंदे पर , लेकिन इसे अधूरी छोड़ने के पीछे का कारण यही है की ये कोई कल्पना नही है , ये बहुत सी लड़कियों की सच्चाई है , जो जिंदगी के इस दौर से जूझ रही है ,बस आपका उनके प्रति नजरिया ही उनको उस अवसाद से निकाल सकता है । मैं सभी से अपेक्षा करूँगा की जो इसे पढ़े वो इसपर अपनी राय जरूर दें , ये ध्यान रखते हुए की आपका कमेंट इस समाज की हर उस साँवली लड़की के लिए है , जो कमी न होते हुए है पीड़ित है। हो सकता है आपका एक कमेंट उनमें सकारात्मकता का संचार करे ,ओर वो फिर से चल पड़े उन मंजिलों की ओर जिन्हें पाने के लिए कोई रंग , कोई जाती ,कोई धर्म की बेड़िया उनका रास्ता न रोक पाएं

लोकेश भिवानी लेखक

 

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